10 करोड़ रुपये की लागत वाराणसी में हाइड्रोजन जलयान: चुनौतियां और भविष्य की संभावनाएं, टिकट 500 रुपये!

By Pawan Sharma

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Hydrogen Ship in Varanasi

हाइड्रोजन जलयान: एक हरित क्रांति की शुरुआत

वाराणसी में हाइड्रोजन जलयान: भइया, आज 2 जनवरी 2026, शुक्रवार को जब हम गंगा की बात करते हैं, तो वाराणसी में चली वो हरित क्रांति याद आती है, जहां Hydrogen Fuel Cell से चलने वाला भारत का पहला देसी जलयान दिसंबर 2025 में शुरू हुआ। ये जहाज, जो कोचिन शिपयार्ड ने बनाया और IWAI ने संभाला, 10 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुआ और गंगा पर जीरो प्रदूषण फैलाता है, सिर्फ पानी ही निकलता है। हमारे जैसे आम लोगों के लिए ये पर्यटन और सफर को आसान बनाता है, क्योंकि ये 50 यात्रियों को एयर-कंडीशंड केबिन में ले जाता है और 12-20 किमी प्रति घंटे की स्पीड से चलता है। नमो घाट से केंद्रीय मंत्री सरबानंद सोनोवाल ने इसे हरी झंडी दिखाई, जो गंगा की सफाई और हरित परिवहन की नई शुरुआत है।

दोस्तों, इस जलयान की टिकट सिर्फ 500 रुपये है, लेकिन चुनौतियां भी हैं जैसे महंगे सामान और हाइड्रोजन सप्लाई की कमी, जो शुरुआती दिनों में थोड़ी परेशानी पैदा कर सकती है। फिर भी, Zero Emission वाली ये तकनीक भविष्य में नदियों पर यातायात को सुरक्षित और स्वच्छ बनाएगी, खासकर वाराणसी जैसे पवित्र शहर में जहां पर्यटन बढ़ेगा। विशेषज्ञ कहते हैं कि अगर सही संचालन हुआ तो ये Sustainable Development को बढ़ावा देगा, और भारत की दूसरी नदियों पर भी ऐसे जहाज चलेंगे। अपनापन तो ये है कि गंगा मां को साफ रखते हुए हमारा सफर अब पर्यावरण दोस्त बन रहा है, क्या कहते हो?

200 मीटर की visibility में मौसम की बाधाएं

भाईयों और बहनों, हमारे वाराणसी की पवित्र गंगा पर अब एक नई शुरुआत हो रही है, जहां Hydrogen Fuel Cell से चलने वाला जलयान पर्यावरण को बचाने का बड़ा कदम साबित हो रहा है। ये जहाज जीरो उत्सर्जन के साथ चलता है, मतलब सिर्फ पानी ही निकलता है, जो हमारी गंगा को और साफ रखने में मदद करेगा। केंद्रीय मंत्री सरबानंद सोनोवाल जी ने दिसंबर 2025 में नामो घाट से इसे हरी झंडी दिखाई, और ये भारत का पहला घरेलू बना हुआ ऐसा जहाज है जो स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा देगा। हम सबके लिए ये गर्व की बात है, क्योंकि इससे नौकरियां बढ़ेंगी और हमारा शहर दुनिया में हरी क्रांति का उदाहरण बनेगा।

लेकिन सर्दियों में कोहरे की वजह से इस जलयान का चलना मुश्किल हो जाता है, क्योंकि दृश्यता कम होने से सुरक्षा का खतरा बढ़ता है। हाल ही में एक छोटी दुर्घटना भी हुई जब एक लकड़ी की नाव से टकराने से इसका सेंसर खराब हो गया, जिससे ऑपरेशन रुक गया। फिर भी, विशेषज्ञ कहते हैं कि रडार और जीपीएस जैसी तकनीक से इन चुनौतियों पर काबू पाया जा सकता है, और गर्मियों में ये और बेहतर चलेगा। कुल मिलाकर, ये Zero Emission वाली पहल Sustainable Development की दिशा में बड़ा कदम है, जो हमारी गंगा को स्वच्छ रखते हुए भविष्य में और जहाजों को लाएगी।

यात्री संख्या: उम्मीद से कम गंगा आरती के समय 700 रुपये

भाईयो और बहनियो, हमारे बनारस की गंगा पर चलने वाला ये Hydrogen Vessel तो बड़ा शानदार है, लेकिन शुरुआत के दिनों में यात्री संख्या उम्मीद से काफी कम रही है। लॉन्च के ठीक बाद 18 दिनों में सिर्फ 100 से कम लोग ही सवारी कर पाए, जबकि जहाज में 50 सीटें हैं और रोज कई ट्रिप हो सकती हैं। इसका सबसे बड़ा कारण टिकट का दाम है – सामान्य राउंड ट्रिप के लिए 500 रुपये और शाम की गंगा आरती के समय 700 रुपये, जो आम नाव की तुलना में महंगा पड़ता है। हम जैसे लोकल लोग या पर्यटक सस्ते विकल्प चुन लेते हैं, इसलिए Ticket Fare को कम करने की जरूरत है ताकि ज्यादा लोग आजमाएं।

कम यात्रियों से जहाज का रखरखाव और आगे चलाना मुश्किल हो रहा है, क्योंकि कमाई कम हो रही है। मैनेजमेंट कहता है कि नया होने की वजह से शुरुआत में ऐसा होता है, लेकिन अगर डिस्काउंट, फैमिली पैकेज या लोकल लोगों के लिए स्पेशल रेट दिए जाएं तो बात बन सकती है। वाराणसी जैसे पर्यटन वाली जगह पर ये Eco-Friendly जहाज पर्यावरण बचाने के साथ-साथ टूरिज्म को नई ऊंचाई दे सकता है, बस कीमत को आम आदमी की जेब के हिसाब से रखना होगा। आने वाले समय में बदलाव आएंगे तो हम सब गंगा पर स्वच्छ और मजेदार सवारी का मजा ले सकेंगे।

वाराणसी में गंगा पर Hydrogen Vessel: हरित क्रांति की शुरुआत, चुनौतियां और भविष्य

Zero Emission तकनीक वाला भारत का पहला स्वदेशी हाइड्रोजन जहाज FCV Pilot-01 अब आम लोगों के लिए उपलब्ध है। टिकट की कीमत सामान्य 500 रुपये और आरती टाइम 700 रुपये रखी गई है, लेकिन शुरुआत में यात्री कम आने से चुनौती बनी हुई है। कोहरे और महंगे दाम की वजह से सेवा प्रभावित हो रही है, फिर भी ये Eco-Friendly पहल गंगा को साफ रखने और पर्यटन बढ़ाने का बड़ा कदम है। आने वाले दिनों में डिस्काउंट से ज्यादा लोग सवारी करेंगे और बनारस दुनिया में ग्रीन ट्रांसपोर्ट का मिसाल बनेगा।

क्रमांककार्य विवरण
1Hydrogen Vessel का परिचयवाराणसी की गंगा पर भारत का पहला हाइड्रोजन ईंधन सेल वाला जहाज, जो बिना धुएं-प्रदूषण के चलता है और सिर्फ पानी निकालता है।
2लॉन्च और उद्घाटनदिसंबर 2025 में नामो घाट से केंद्रीय मंत्री ने हरी झंडी दिखाई, ये पूरी तरह देश में बना हुआ (इंडिजिनस) जहाज है।
3तकनीक और क्षमताZero Emission तकनीक पर चलता है, 50 सीटों वाला जहाज, पर्यटन और रोजमर्रा की यात्रा के लिए बनाया गया है।
4टिकट दरेंसामान्य टिकट Ticket Fare 500 रुपये, शाम की गंगा आरती के समय 700 रुपये, आम नावों से महंगा है।
5यात्री संख्याशुरुआती 18 दिनों में सिर्फ 100 से कम यात्री आए, जबकि रोजाना कई ट्रिप हो सकती थीं।
6मौसमी चुनौतीसर्दियों में कोहरे की वजह से दृश्यता कम होने पर सेवा बंद हो जाती है, कम से कम 200 मीटर दृश्यता जरूरी।
7छोटी दुर्घटनाएक बार लकड़ी की नाव से टकराने से सेंसर खराब हुआ, जिससे कुछ दिनों तक ऑपरेशन रुका रहा।
8भविष्य की उम्मीदगर्मियों में मौसम साफ रहने से ज्यादा यात्री और सफलता की संभावना, विशेषज्ञों का मानना है।
9सुधार के सुझावडिस्काउंट, फैमिली पैकेज या लोकल लोगों के लिए स्पेशल रेट देने से यात्री संख्या बढ़ सकती है।
10बड़ा लाभये Eco-Friendly पहल गंगा को साफ रखने के साथ पर्यटन को बढ़ावा देगी और नौकरियां भी पैदा करेगी।

जागरूकता की कमी और प्रचार की जरूरत, घाटों पर Awareness Campaign

भाईयो और बहनियो, हमारे बनारस की गंगा पर चलने वाला ये Hydrogen Vessel तो पर्यावरण का सच्चा दोस्त है, लेकिन अभी कई लोग इसे जानते तक नहीं हैं, इसलिए यात्री कम आ रहे हैं। दिसंबर 2025 में लॉन्च होने के बाद भी जागरूकता की कमी से पर्यटक पुरानी सस्ती नावें ही चुन लेते हैं, जबकि ये जहाज शोर-मुक्त और प्रदूषण-रहित है। अगर सोशल मीडिया, लोकल रेडियो और घाटों पर Awareness Campaign चलाए जाएं तो हम सब समझेंगे कि ये गंगा को साफ रखने में कितना बड़ा योगदान दे रहा है। अधिकारियों को प्रचार पर जोर देना चाहिए, ताकि हमारा शहर ग्रीन टूरिज्म का चमकता उदाहरण बने।

बेहतर मार्केटिंग से इस जहाज को बनारस की शान बनाया जा सकता है, जैसे स्पेशल टूर पैकेज, ग्रुप डिस्काउंट या स्कूलों के लिए एजुकेशनल ट्रिप। लोग जब जानेंगे कि ये Eco-Friendly तकनीक से सिर्फ पानी निकालता है और भविष्य की हरित क्रांति है, तो मांग अपने आप बढ़ जाएगी। स्थानीय समुदाय और पर्यटकों को शामिल करके जागरूकता फैलाई जाए तो नौकरियां भी बढ़ेंगी और गंगा पर स्वच्छ सवारी का मजा सब ले सकेंगे। आने वाले समय में प्रचार से ये प्रोजेक्ट नई ऊंचाइयां छुएगा, बस शुरुआत करनी होगी।

भविष्य की संभावनाएं और सुधार

भाईयो और बहनियो, हमारे बनारस की गंगा पर चलने वाला ये Hydrogen Vessel हरित ऊर्जा की दिशा में भारत का बड़ा और गर्व भरा कदम है, जो आगे चलकर अन्य शहरों जैसे प्रयागराज या पटना के लिए मिसाल बनेगा। ये Zero Emission जहाज सिर्फ पानी निकालता है, जिससे गंगा और साफ रहेगी, सड़क की भीड़ कम होगी और पर्यटन को नई रफ्तार मिलेगी। विशेषज्ञ कहते हैं कि अगर शुरुआती चुनौतियां जैसे कोहरा या महंगा किराया दूर हो जाएं, तो वाराणसी दुनिया के चुनिंदा शहरों में शामिल हो जाएगा जहां Green Transport से लाखों लोग फायदा उठाएंगे। आने वाले सालों में ये प्रोजेक्ट नौकरियां बढ़ाएगा और हमारी अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाएगा।

भविष्य में सुधार के लिए ज्यादा निवेश की जरूरत है, जैसे और जहाज जोड़ना, हाइड्रोजन स्टेशन बढ़ाना या टिकट को और सस्ता करना। रिसर्च से नई तकनीक आएगी जो मौसम की दिक्कतों को कम करेगी, जैसे बेहतर रडार या ऑल-वेदर नेविगेशन। ये पायलट प्रोजेक्ट IWAI की लंबी योजना का हिस्सा है, जो पूरे देश में नदियों पर स्वच्छ यातायात की नींव रखेगा। कुल मिलाकर, सही प्रयासों से ये Sustainable Future हम सबके लिए उज्ज्वल और हरा-भरा बनेगा, बस धैर्य और सपोर्ट रखें।

निष्कर्ष

वाराणसी का हाइड्रोजन जलयान एक महत्वपूर्ण project है, जो हरित ऊर्जा की क्षमता दिखाता है, लेकिन शुरुआती चुनौतियां जैसे उच्च fare और कोहरे ने इसकी प्रगति को प्रभावित किया है। कम यात्री संख्या से सीखते हुए, जागरूकता और सुधार से इसे सफल बनाया जा सकता है। यह भारत के sustainable विकास का प्रतीक है, जो पर्यावरण संरक्षण और नवाचार को जोड़ता है। क्या हम ऐसे बदलावों के लिए तैयार हैं?

यह जलयान न केवल गंगा को स्वच्छ रखेगा, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक उदाहरण बनेगा। Innovation और collaboration से हम वैश्विक स्तर पर हरित क्रांति ला सकते हैं। पाठक सोचें कि व्यक्तिगत स्तर पर हम कैसे योगदान दे सकते हैं, ताकि ऐसे initiatives सफल हों।

FAQs
Q.1: Hydrogen powered vessel in varanasi contact number
Ans: The contact number for the hydrogen-powered vessel in Varanasi is not publicly listed, but tickets can be obtained at the Namo Ghat ticket counter. For inquiries, contact the Inland Waterways Authority of India (IWAI) Varanasi office at their general helpline or visit the site.

Q.2: Best hydrogen powered vessel in varanasi
Ans: The hydrogen-powered vessel at Namo Ghat is currently the best and only one in Varanasi, offering zero-emission rides on the Ganga with air-conditioned comfort for up to 50 passengers.

Q.3: Which is the first hydrogen fuel cell vessel in India?
Ans: India’s first indigenous hydrogen fuel cell vessel was launched in Varanasi at Namo Ghat on December 11, 2025, marking a milestone in green inland water transport.

Q.4: What is the mileage of 1 kg of hydrogen?
Ans: In hydrogen fuel cell vehicles, 1 kg of hydrogen typically provides around 60 miles (about 97 km) of range, equivalent to the energy in one gallon of gasoline, depending on the vehicle efficiency.

Q.5: Which city launched India’s first hydrogen bus?
Ans: Pune launched India’s first indigenously developed hydrogen fuel cell bus, developed by the Council of Scientific and Industrial Research (CSIR) and KPIT Technologies.

Q.6: भारत में पहला हाइड्रोजन ईंधन सेल पोत कौन सा है?
Ans: भारत का पहला हाइड्रोजन ईंधन सेल पोत वाराणसी में नमो घाट पर लॉन्च किया गया, जो जीरो उत्सर्जन वाला 24 मीटर लंबा कैटामरन है।

Q.7: भारत की पहली हाइड्रोजन बस किस शहर ने लॉन्च की?
Ans: भारत की पहली हाइड्रोजन बस पुणे शहर ने लॉन्च की, जो सीएसआईआर और केपीआईटी द्वारा विकसित की गई थी।

Q.8: भारत में कितनी हाइड्रोजन बसें हैं?
Ans: 2026 तक भारत में हाइड्रोजन बसों की संख्या सीमित है, मुख्य रूप से पायलट प्रोजेक्ट्स में लगभग 50-100 बसें चल रही हैं, और 2030 तक 1000 तक पहुंचने का लक्ष्य है।

Q.9: क्या हाइड्रोजन बसें ऑक्सीजन का उत्पादन करती हैं?
Ans: नहीं, हाइड्रोजन बसें ऑक्सीजन का उत्पादन नहीं करतीं; वे हाइड्रोजन और हवा से ऑक्सीजन का उपयोग करके बिजली बनाती हैं, और बायप्रोडक्ट के रूप में केवल पानी निकालती हैं।

Q.10: क्या हाइड्रोजन एलपीजी से सस्ता है?
Ans: वर्तमान में हाइड्रोजन एलपीजी से महंगा है, क्योंकि उत्पादन लागत अधिक है, लेकिन 2030 तक ग्रीन हाइड्रोजन की कीमत $2/किग्रा से कम होने की उम्मीद है।

Q.11: क्या ओएनजीसी हाइड्रोजन का उत्पादन करती है?
Ans: हां, ओएनजीसी ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन कर रही है और 2035 तक $10 बिलियन निवेश के साथ 0.15 मिलियन टन सालाना उत्पादन का लक्ष्य रखती है।

Q.12: हाइड्रोजन का सबसे बड़ा उत्पादक कौन है?
Ans: दुनिया में सबसे बड़ा हाइड्रोजन उत्पादक चीन है, जबकि भारत में लिंडे और एयर प्रोडक्ट्स जैसी कंपनियां प्रमुख हैं; ग्रीन हाइड्रोजन में रिलायंस और अदानी उभर रहे हैं।

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Pawan Sharma

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